👏👏👏✍🏼🙏 *आज सुबह जब में तुलसी दास कृत रामायण पढ़ रहा था तो एक प्रसंग को देख कर* *उत्सुकता जागी कि क्यों विवाह संस्कार जरूरी है हमारे जीवन मे क्यों हमें लक्ष्मी रूपा अर्धांगिनी के साथ साथ फेरे लेकर* *सात वचनो का पालन करते हूये खुश रहना चाहिए। इस लेख से स्पष्ट दिखाई देने लगता* है। 🍒✍🏼🙏 *आजतक किसी भी भगवान ने जितने भी अवतारों में जंन्म लेकर मनुष्य रूप को धारण किया, चाहे*
🙏✍🏼👏🍒 *श्री राम, श्री कृष्णा, भगवान शिवा सबने अर्धांगिनी के बगैर अपने आप को अपूर्ण महशूश किया था।* ✍🏼👏🙏 *फिर आदि शक्ति यानी प्रकृति ने , मां पार्वती, लक्ष्मी, सिता ,राधा बनकर उस मनुष्य के अर्ध स्वरूप को संमपुर्ण किया है संजोग द्वारा ओर इसी संजोग को हम विवाह संस्कार कहते हैं*।
✍🏼👏🙏 *यह इंसान की आत्म शांति के लिए, खुशीयों के लिए , रिस्तेनातो के लिए निहायत जरूरी है। ताकि सब के साथ हंस बोल कर अपने इस जन्म को संपूर्ण करे। ओर आत्मा की प्रगती करते हुये आगे बढ़ेंगे तो* ✍🏼👏🙏 *हर जंन्म में ऊंचतम यश मान धन और ओहदा बढ़ता जाता है। धिरे धिरे वह आत्मा कई देशो के राजा के रूप में सुख भोगकर भगवान में वापिस विलीन हो जाती है आत्मा*
🙏✍🏼👏 *और यही सनातन सत्य है। शिवपुराण में भी इस रहस्य को बड़ी गहराई से वर्णन मिलता है* ✍🏼👏🙏 *इस एक संजोग में जो हम कर्म या व्यवहार करते हैं इन कर्मों को हम अगले सात जन्मों तक कैरी करतें हैं जिनको ज्योतिष विद्या में पैंडिंग कर्म कहा गया है।*
🙏✍🏼👏🌜 *तो फिर हमें हर रिश्ते को भरपूरता जिना ओर निभाना चाहिए। इसको भी तो हमें भगवान की मंशा मान लेनी चाहिए*।
🙏👏✍🏼 *की उसी भगवान ने तो भेजा है कुछ बाकी संजोग पिछले जन्म के बाकी है उनको साथ मिलकर पुरे करना है 🌛🌛🌛 मन खुश रहने पर खुशी जीवन में आती है और संतोष बढ़ने पर स्वास्थ्य और एक दुसरे के लिए प्यार ओर समर्पण भी बढ़ता है। वर्ना इंतजार ही ईंतजार*
🙏 *फिर क्यों हम 100% कि आस लगाकर बैठ जाते हैं। जब सबकुछ उन भगवान रूपी शक्तियों को नहीं मिला तो मैं कोनसे खेत कि मुली हूं।*
✍🏼👏🙏🍒 *जब हर सुख मिलना ही नहीं तो सोचये, Delay काहे का इसे बचें। कोई 15 गुणी, तो कोई 16%गुणी फर्क तो सोच का ही है* *कोई 19 तो कोई 21का, कोई सेर तो कोई सवासेर संजोग तो होकर ही रहेंगा खुश रहें आबाद रहे। यही तो जीवन है* Regards jsliiieyes@gmail.com जgबीr लाठर 🍒🍒🍒🍒🍒🍒👏👏👏👏👏👏🙏✍🏼🙏✍🏼🙏✍🏼

