कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स: बॉडीगार्ड कब, और गुंडे कब बनते हैं?
1. कोलेस्ट्रॉल की सही रेंज क्या है?
- Normal Range: 150 से 200 mg/dL
- 150-200: यह कोलेस्ट्रॉल बॉडीगार्ड की तरह शरीर की रक्षा करता है।
- 200+: जैसे ही ये बढ़ता है, यह 'गुंडे' बन जाते हैं और दिल की सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं।
2. कोलेस्ट्रॉल आता कहां से है?
- Animal Foods से आता है। जैसे:
- सबसे ज्यादा: मटन
- फिर: चिकन → फिश → दूध
- दूध में भी: भैंस का दूध > गाय का दूध > टोन्ड > डबल टोन्ड > स्किम्ड मिल्क
- Plant Based Food (दाल, चावल, रोटी, सब्ज़ी) में कोलेस्ट्रॉल नहीं होता।
3. कोलेस्ट्रॉल से कैसे बचें?
- मटन, चिकन, भैंस का दूध जैसे भारी एनिमल प्रोडक्ट्स को अवॉइड करें।
- स्किम्ड मिल्क, फल-सब्ज़ियों और एक्सरसाइज़ को डाइट में शामिल करें।
- इलाज से बेहतर है परहेज़।
4. ट्राइग्लिसराइड्स क्या हैं और इनकी सही रेंज?
- Normal Range: 100 से 150 mg/dL
- 150+: यह भी ‘गुंडे’ बन जाते हैं और दिल को खतरा देते हैं।
5. ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ते हैं किससे?
- तेल, मिठाइयां, बेकरी आइटम्स, केक, पेस्ट्री, कुकीज़, पास्ता जैसे प्रोसेस्ड फूड से।
- Refined तेल, fast food और sugary चीजों से भरपूर।
6. कौन से तेल बेहतर हैं? (कोलेस्ट्रॉल फ्री ऑइल्स)
ध्यान रखें: सभी प्लांट बेस्ड ऑइल्स कोलेस्ट्रॉल फ्री होते हैं, लेकिन इनमें ट्राइग्लिसराइड्स होते हैं।
- बेस्ट विकल्प (थोड़ी मात्रा में):
- सरसों का तेल (North India)
- नारियल तेल (South India)
- तिल का तेल (Winters)
- राइस ब्रान ऑइल
- बचें:
- देसी घी, बटर, कॉड लिवर ऑइल (ये कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स दोनों से भरपूर होते हैं)
7. सप्लीमेंट या मेडिसिन चाहिए?
- अगर कोलेस्ट्रॉल/ट्राइग्लिसराइड्स बहुत ज्यादा हैं, तो परहेज के साथ कुछ सप्लीमेंट भी मदद कर सकते हैं।
- कोई मेडिसिन या आयुर्वेदिक सप्लीमेंट यूज़ करने से पहले डॉक्टर या डाइटीशियन से सलाह लें।
अंत में संदेश:
“शेयर करना मत भूलिए।” क्योंकि जब आप हेल्थ की जानकारी शेयर करते हैं तो न केवल दूसरों को बचाते हैं, बल्कि आपका अच्छा कोलेस्ट्रॉल (HDL) भी बढ़ता है — ऐसा माना जाता है।
6 प्रमुख उपयोग बताए गए हैं, जिनका प्रयोग विशेष बीमारियों या तकलीफों को ठीक करने के लिए किया जाता है:
1. सूजन, जोड़ों का दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव या अंदरूनी चोट के लिए:
- अदरक में मौजूद जिंजरोल एक नेचुरल एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट होता है।
- यह शरीर में पुरानी सूजन और दर्द को कम करता है।
2. नॉजिया (जी मिचलाना), मोशन सिकनेस, प्रेगनेंसी मॉर्निंग सिकनेस:
- अदरक का रस, अदरक की चाय या अदरक + नींबू + नमक का सेवन करने से जी मिचलाना तुरंत शांत होता है।
- कीमोथेरेपी के बाद जी मिचलाने में भी राहत देता है।
3. मोटापा और वजन कम करने के लिए:
- अदरक मेटाबॉलिज्म बढ़ाता है और शरीर का फैट बर्न करने की प्रक्रिया को तेज करता है।
- भूख कम करता है जिससे ओवरईटिंग नहीं होती।
4. ब्लड शुगर और डायबिटीज कंट्रोल के लिए:
- रोज़ाना 2 ग्राम अदरक का सेवन करने से:
- फास्टिंग ब्लड शुगर 12% तक कम हुआ।
- HbA1c लेवल 10% तक घटा।
- हार्ट डिजीज के खतरे को भी कम करता है।
5. पाचन तंत्र सुधारने, गैस, अपच, पेट फूलना, जलन, भारीपन में:
- पाचन एंजाइम्स के निर्माण को बढ़ाता है।
- गैस्ट्रिक एंप्टिंग टाइम कम करता है जिससे खाना जल्दी पचता है और पेट हल्का लगता है।
6. कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल, हृदय स्वास्थ्य और नसों की मजबूती के लिए:
- खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) कम करता है।
- अच्छा कोलेस्ट्रॉल (HDL) बढ़ाता है।
- एथेरोसिस (धमनियों की रुकावट) की प्रक्रिया को धीमा करता है।

